गुड़िया
पैसा हो तो सब ख़रीद सकते हैं!
दुनिया में हर एक चीज़ बिकती हैं!
इंसान से इंसान को ख़रीदते देखा हैं मैंने!
इंसानो की जात बिकतीं हैं!
पूर्वजों की निशानी, आगामी पीढी के लज़्ज़त,
मासूमों के सपने और हँसी बिकती हैं!
दिल रोता है बेवजह, पागल!
वो क्या हैं? एक हाड़-माँस की गुड़िया!
बाज़ार में हज़ार बिकती हैं!
~Sunny Rathor

Comments
Post a Comment